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यूट्यूब टीचर्स बनाम अंजना ओम कश्यप: सोशल मीडिया पर छिड़ा घमासान, ऑनलाइन शिक्षकों ने दिया करारा जवाब
Tuesday, June 2, 2026

यूट्यूब टीचर्स बनाम अंजना ओम कश्यप: सोशल मीडिया पर छिड़ा घमासान, ऑनलाइन शिक्षकों ने दिया करारा जवाब

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नई दिल्ली: देश की जानी-मानी टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप के एक बयान ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक लाइव डिबेट के दौरान अंजना ओम कश्यप द्वारा कुछ यूट्यूब शिक्षकों और एक्सप्लेनर वीडियो बनाने वालों को लेकर की गई तीखी टिप्पणी के बाद देश भर के ऑनलाइन एजुकेटर्स, यूट्यूब टीचर्स और छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

एक टीवी डिबेट के दौरान अंजना ओम कश्यप ने यूट्यूब पर पढ़ाने वाले और विभिन्न मुद्दों पर वीडियो बनाने वाले कुछ शिक्षकों की आलोचना की थी। आरोप है कि उन्होंने चर्चा के दौरान कुछ ऑनलाइन शिक्षकों को 'दो कौड़ी का' और 'फ्रॉड' तक कह दिया। उनका तर्क था कि कई यूट्यूबर्स और ऑनलाइन शिक्षक सिर्फ व्यूज (Views) और ध्यान आकर्षित करने के लिए भ्रामक बातें फैलाते हैं और गंभीर ज्ञान की कमी के बावजूद खुद को बड़ा विशेषज्ञ दिखाते हैं।

यूट्यूब शिक्षकों का करारा पलटवार

अंजना ओम कश्यप का यह बयान वायरल होते ही देश के बड़े-बड़े यूट्यूब एजुकेटर्स (जैसे अंकित अवस्थी सर, मोहित सर, डीके सर और नवदीप सर) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। ऑनलाइन शिक्षकों का कहना है:

  • शिक्षा का लोकतांत्रीकरण: शिक्षकों ने कहा कि यूट्यूब ने पढ़ाई को अमीर-गरीब के भेद से ऊपर उठा दिया है। जो गरीब बच्चा दिल्ली, पटना या कोटा जैसे महंगे शहरों में जाकर लाखों की फीस और हॉस्टल का खर्च नहीं उठा सकता, वह आज घर बैठे यूट्यूब के जरिए फ्री या बेहद कम दाम में क्वालिटी एजुकेशन पा रहा है।
  • सिस्टम और पेपर लीक पर सवाल: शिक्षकों का तर्क है कि जब देश में NEET, JEE या अन्य सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक (Paper Leak) होते हैं, तो मुख्यधारा का मीडिया अक्सर खामोश रहता है। ऐसे समय में यही यूट्यूब टीचर्स छात्रों की आवाज बनते हैं और सिस्टम से सवाल पूछते हैं, जिससे मुख्यधारा के मीडिया को अपनी प्रासंगिकता खोने का डर सता रहा है।
  • योगदान बनाम पद: ऑनलाइन एजुकेटर्स ने कहा कि किसी भी शिक्षक का सम्मान उसके व्यूज या पद से नहीं, बल्कि समाज में उसके योगदान से होता है। लाखों छात्रों को सिविल सर्विसेज, एसएससी, रेलवे और बैंकिंग परीक्षाओं में पास कराने का श्रेय इन्हीं यूट्यूब शिक्षकों को जाता है।

सोशल मीडिया पर छात्रों का समर्थन

ट्विटर (X), यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर लाखों छात्र अपने शिक्षकों के समर्थन में उतर आए हैं। छात्रों का कहना है कि लॉकडाउन के समय से लेकर आज तक यूट्यूब शिक्षकों ने देश के सुदूर गांवों तक शिक्षा पहुंचाई है। पूरी टीचिंग कम्युनिटी को एक ही तराजू में तौलना और उनके लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना बिल्कुल गलत है।

इस विवाद ने एक बार फिर पारंपरिक मुख्यधारा के मीडिया (Mainstream Media) और उभरते हुए डिजिटल एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स के बीच की खाई और वैचारिक टकराव को दुनिया के सामने ला दिया है।

शिक्षक समुदाय का संदेश: "ज्ञान की कीमत लगाई जा सकती है, लेकिन शिक्षक के सम्मान की कोई कीमत नहीं होती। मुख्यधारा के मीडिया को ऑनलाइन शिक्षा की ताकत और उसकी पहुंच का सम्मान करना सीखना चाहिए।"