
दिल्ली में पानी का संकट गहराया, कई इलाकों में टैंकरों पर निर्भर लोग
दिल्ली में गर्मी बढ़ने के साथ पानी का संकट एक बार फिर गहरा गया है। राजधानी के कई इलाकों में नलों से पानी की सप्लाई कम हो गई है, जबकि कई जगह लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं।
सुबह से ही लोग खाली बाल्टी, ड्रम और कैन लेकर टैंकरों की लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं। कई परिवारों का कहना है कि पानी की सप्लाई इतनी अनियमित हो गई है कि खाना बनाने, कपड़े धोने और नहाने जैसी बुनियादी जरूरतें भी मुश्किल हो रही हैं।
यमुना में जलस्तर कम होने और वजीराबाद बैराज पर पानी की कमी के कारण जल शोधन संयंत्रों की क्षमता प्रभावित हुई है, जिसका असर दिल्ली के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति पर पड़ रहा है। झुग्गी-बस्तियों और घनी आबादी वाले इलाकों में हालात ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं।
पानी की कमी का असर घरों के साथ-साथ बाजारों, छोटे व्यवसायों और रोज कमाने-खाने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है। कई परिवारों को मजबूरी में पानी खरीदना पड़ रहा है, जिससे गरीब और निम्न आय वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को पानी की स्थिति की समीक्षा कर तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से हरियाणा से कच्चे पानी की आपूर्ति बनाए रखने को लेकर बातचीत की जा रही है, ताकि जल शोधन संयंत्रों को पर्याप्त पानी मिल सके और सप्लाई में सुधार हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली का जल संकट सिर्फ मौसमी समस्या नहीं है। बढ़ती आबादी, पुरानी पाइपलाइन, लीकेज, भूजल पर निर्भरता और गर्मियों में बढ़ती मांग इस समस्या को हर साल गंभीर बना देती है।
फिलहाल दिल्लीवासियों की सबसे बड़ी मांग यही है कि पानी की सप्लाई नियमित की जाए और टैंकर व्यवस्था पारदर्शी तरीके से हो। राजधानी जैसे बड़े शहर में पानी सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की मूल जरूरत है।


