
जब सरकार नए स्कूल खोलने के बजाय पुराने विद्यालय बंद करने लगे, तो इसे विकास कहा जाए या गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
स्कूलों के लगातार मर्जर से प्राथमिक शिक्षा बर्बाद कर रही भाजपा: आदेश भारद्वाज
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत प्राइमरी स्कूलों के मर्जर को लेकर कांग्रेस नेता आदेश भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की कमी छिपाने के लिए स्कूलों को बंद कर रही है।
आदेश भारद्वाज के अनुसार, हाल ही में एमसीडी ने 13 प्राथमिक विद्यालयों के विलय का आदेश जारी किया है। इनमें करोलबाग जोन के आठ, नरेला जोन के चार और शाहदरा जोन का एक स्कूल शामिल बताया गया है। स्कूल बंद होने के बाद कई बच्चों को अब चार से पांच किलोमीटर दूर स्थित विद्यालयों में जाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इससे सबसे अधिक परेशानी दिहाड़ी मजदूर परिवारों को हो रही है, जो रोज बच्चों को स्कूल छोड़ने और वापस लाने की स्थिति में नहीं हैं। छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
भारद्वाज ने कहा कि कम छात्र संख्या का तर्क देकर दशकों पुराने स्कूलों को बंद करना उचित नहीं है। सरकार को विद्यालय भवनों की मरम्मत, शिक्षकों की नियुक्ति, शौचालय, जलभराव और अन्य बुनियादी समस्याओं का समाधान करना चाहिए था। इसके विपरीत बिना पर्याप्त तैयारी के स्कूलों का मर्जर कर बच्चों को दूर भेजा जा रहा है।
उन्होंने पूर्व कांग्रेस सरकार की मिड-डे मील और लाडली योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों, विशेषकर लड़कियों, को शिक्षा से जोड़कर रखना था।
आदेश भारद्वाज ने दावा किया कि लगभग दो वर्ष पहले भी इसी प्रकार करीब 30 स्कूल बंद किए गए थे। उन्होंने आशंका जताई कि स्कूलों में भीड़ बढ़ने से पढ़ाई प्रभावित होगी और ड्रॉपआउट दर में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने इसे शिक्षा के अधिकार और गरीब बच्चों के भविष्य पर सीधा हमला बताया।
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